🔴 बोर्ड परीक्षा के दौरान डीआईओएस और केन्द व्यवस्थापकों के मनमानेपन व लापरवाही से गाइडलाइन व नियम-कानून की धज्जियाँ उडाने का मामला
🔵 युगान्धर टाइम्स व्यूरो
कुशीनगर। मुख्यमंत्री जी। जिले मे बोर्ड परीक्षा के दौरान डीआईओएस और केन्द व्यवस्थापकों द्वारा मनमानेपन ढंग से गाइडलाइन व नियम-कानून की धज्जियाँ उडाने के बावजूद अभी तक न तो डीआईओएस पर कोई कार्रवाई हुई, न ही उत्तर पुस्तिका गायब करने वाले केन्दाध्यक्ष को निलंबित किया गया और न ही रिजर्व पेपर से परीक्षा कराने वाले अशोक विद्यापीठ इंटर कालेज को डिबार किया गया। यह तो तय है कि योगी सरकार में कार्रवाई निश्चित होगी, लेकिन कब होगी कार्रवाई इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। यही वजह है कि आम लोगो के जेहन में यह उठ रहा कि कही शासन-सत्ता में बैठे लोगो से संपर्क कर डीआईओएस सहित अन्य दोषी, मामले को मैनेज करने के लिए जुगाड़ तो नही लगा रहे?
बतादे कि 7 मार्च को जनपद के कसया थाना क्षेत्र के सोहसा मठिया स्थित जनता इंटर कॉलेज जो परीक्षा केंद्र था जहां प्रथम पाली में हाईस्कूल के तकरीबन 283 छात्रो ने अंग्रेजी विषय की परीक्षा दी थी। विभाग व प्रधानाचार्य द्वारा तैयार किये गये स्क्रीप्ट के मुताबिक केन्द्र व्यवस्थापक /प्रधानाचार्य कपिलदेव प्रसाद परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरपुस्तिका का बण्डल बाइक पर पीछे बाधकर अकेले बुद्ध इंटरमीडिएट कालेज कुशीनगर के संकलन केंद्र पर जा रहे थे कि रास्ते मे उत्तरपुस्तिका का बण्डल कही गिर गया। हास्यास्पद बात यह है कि 283 उत्तर पुस्तिकाओ का बंडल जिसका वजन लगभग बीस किलोग्राम होगा बाइक से रास्ते मे कही गिर गया और चालक रुपी प्रधानाचार्य को इसकी भनक तक नही लगी, जबकि ऐसी परिस्थिति मे बाइक का लहराना व सडक पर कोई सामान गिरने पर राहगीरों द्वारा चिल्लाना आम बात है। ऐसे मे प्रधानाचार्य के बाइक से रास्ते मे उत्तर पुस्तिका का सडक पर गिरना और फिर सडक पर से उत्तर पुस्तिका का अदृश्य हो जाना आम लोगो के गले नही उतर रहा है। यही वजह है कि आज भी यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है कि उत्तर पुस्तिका गुम हुआ है या फिर गायब किया गया है?
🔵 नही हुआ अब तक निलंबनऐसी चर्चा रही कि उत्तर पुस्तिका गायब होने के मामले मे डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त व जनता इंटरमीडिएटकालेज के प्रधानाचार्य कपिलदेव प्रसाद मिलकर इस मामले को पचाने के लिए पुन: कापी लिखवाकर संकलन केन्द्र पर जमा कराने के फिराक में थे। किन्तु जब मामला मीडिया के संज्ञान में आया और मीडिया लगातार डीआईओएस व प्रधानाचार्य सहित उच्चाधिकारियों से संपर्क कर मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया तो डीआईओएस ने खुद को और कंट्रोल रूम प्रभारी को बचाते हुए देर रात जनता इंटरमीडिएट कालेज के केन्द्र व्यवस्थापक /प्रधानाचार्य कपिलदेव प्रसाद के साथ साथ संकलन केन्द्र प्रभारी /बुद्ध इंटरमीडिएट कालेज के प्रधानाचार्य उमेश उपाध्याय के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करा दिया जबकि संकलन केन्द्र प्रभारी उमेश उपाध्याय की भूमिका कही भी संदिग्ध नही था। सूत्र बताते है कि डीआईओएस, जनता इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कपिलदेव प्रसाद को अपने साथ कसया थाने लेकर गये जहां जहां प्रधानाचार्य रातभर थाने मे रहे और सुबह मुचलके पर रिहा हुए। इसके बावजूद अभी तक प्रधानाचार्य कपिलदेव प्रसाद का निलंबन नही हुआ जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
🔴 अब तक नही हुआ स्कूल डिबार2 मार्च को फाजिलनगर विकास खण्ड क्षेत्र के नकटहा मिश्र स्थित अशोक विद्यापीठ इंटर कालेज मे रिजर्व में रखे गये पेपर से परीक्षा कराने के मामले में विद्यालय व विद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त इस संगीन मामले को पचाने व घटना को झुठलाने मे लगे रहे। लेकिन '' युगान्धर टाइम्स '' व लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्रों द्वारा इस प्रकरण को लगातार प्रमुखता से उठाने के बाद डीआईओएस ने केन्द्र व्यवस्थापक और सह केन्द्र व्यवस्थापक को निलंबित कर मामले को ऐसे पटाक्षेप कर दिया जैसे कोई सामान्य प्रकरण हो, जबकि इस मामले मे विद्यालय को डिबार करना व विद्यालय पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है ऐसा जानकारों का कहना है।
🔴 इन पर नही हुई कोई कार्रवाईबोर्ड परीक्षा के शुभारंभ के पहले दिन 24 फरवरी को जिले के खड्डा स्थित किलानी देवी इंटरमीडिएट कालेज मे संपन्न हुई इंटरमीडिएट के हिन्दी (कोड संख्या 301) व सामान्य हिन्दी (कोड संख्या 302) विषय की परीक्षा का उत्तरपुस्तिका केन्द्रव्यवस्थापक के लापरवाही के कारण एक ही बण्डल में बाधकर पडरौना स्थित उदित नारायण इंटरमीडिएट कालेज में बने संकलन केन्द्र पर जमा कराने के मामले मे भी डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त केन्द्र व्यवस्थापक के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नही किये है। बताया जाता है कि डीआईओएस के संज्ञान में जब यह मामला आया तो उन्होने जिलाधिकारी व सचिव बोर्ड गोरखपुर को इसकी जानकारी दिये बगैर, बिना किसी उच्चाधिकारियों के अनुमति से संकलन केन्द्र पहुंचकर एक ही बण्डल मे बाधकर रखे गये हिन्दी 301 व सामान्य हिन्दी 302 का उत्तरपुस्तिका अलग अलग बण्डलो में कराकर जमा करा दिया,जो नियम विरुद्ध है। ऐसे मे सवाल यह उठता है बोर्ड परीक्षा की सुचिता और पारदर्शिता को पूरी तरह तार तार व बोर्ड परीक्षा की गाइड लाइन की धज्जियाँ उडाकर सरकार की छवि को धूमिल करने वाले डीआईओएस पर योगी सरकार कब करेगी कार्रवाई?
🔴 क्या कहता है कानून
जानकारों की माने तो सार्वजनिक परीक्षा की शुचिता व गोपनीयता भंग करने व पेपर लीक करने या गलत जानकारी देने पर अनुचित साधन निवारण अधिनियम के तहत दस साल की जेल और दस लाख रुपये का जुर्माना है। इतना ही नही पेपर लीक और नकल समेत परीक्षा से जुडी गड़बडिय़ों में परीक्षा संस्थान या परीक्षा कराने वाली एजेंसी शामिल पाई जाती है तो उससे उस परीक्षा का पुरा खर्च वसूला जायेगा। साथ ही उसकी संपत्ति भी कुर्क और जब्त की जा सकती है जो जनता इंटरमीडिएट कालेज के केन्द्र व्यवस्थापक /प्रधानाचार्य व अशोक विद्यापीठ पर लागू हो सकता है।
🔵 रिपोर्ट - संजय चाणक्य
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